सोमवार, 6 जनवरी 2020

अगर आपको आपका "सच्चा प्यार" 20 साल बाद मिल जाये तो आप क्या करोगे?

अपने पहले प्‍यार से मैं तीस साल बाद मिला, आभासी दुनिया में। चैट पर उसने कहा कि मैंने कभी खुल कर क्‍यों नहीं कहा कि उससे प्‍यार करता हूं। बस कविताएं करते रहे मुझ पर। एक बार खुलकर कहते तो आज शायद हम साथ होते।

मैंने कहा - मुझे तो पता ही नहीं चला कि तुम क्‍या सोचती हो। ऐसे में मैं कोई निर्णय कैसे ले लेता। फिर तुम्‍हारे परिवार में लगाव का भेद खुल जाने से जो रोका टोकी शुरू हो गयी थी उसने बाधा डाली, फिर तुम्‍हारी शादी हो गयी।

तीस साल बाद अजीब ढंग से उसमें मेरे प्रति दीवानगी पैदा हो गयी थी, जो उस समय नहीं थी उसमें। उसका कहना था कि वह बस एक बार मुझसे मिलना और छूकर देखना चाहती है।

पर भौगोलिक दूरी के चलते यह संभव नहीं हो पा रहा था। और मुझमें अब कोई दीवानगी नहीं बची थी। पर मेरे लिए उसका ऐतिहासिक महत्‍व तो था ही, आखि‍र वह मेरा पहला आकर्षण थी।

फिर संयोग से आते जाते एक बार आधे घंटे साथ बातें करने का मौका मिला। उसने मेरे कमीज के पाकेट में उत्‍साह पूर्वक एक कलम टांकी।

मैंने कुछ किताबें दीं। मैं कोई अतिरिक्‍त उत्‍साह नहीं दिखा पाया।

इस मुलाकात के बाद उसने कहा कि आपने मुझे तवज्‍जो नहीं दी। अब तीस साल पुरानी तवज्‍जो कहां से लाउं।

अब उनकी दीवानगी कम गयी है। पर मित्रता है, वह शायद उम्र भर रहे।


Jay Deep ने जवाब का अनुरोध किया है

रविवार, 5 जनवरी 2020

हिंदु धर्म में यज्ञ क्यों करते है इसके पीछे क्या राज है?

इसमें कोई राज नहीं है। कभी सारी दुनिया में जंगल थे। तो उन्‍हें हटाकर जंगल बनाने को जलाया जाता था। इसके लिए जंगल वासियों और उसे नष्‍ट करने वालों में लडाई होती थी। जो जंगल की रक्षा करते थे वे राक्षस कहलाए। खेती की संस्‍कृति के विकास के साथ खेतीहर समाज बढता गया। और जंगल जलाना प्रतीक रूप में यज्ञ के रूप में खेतीहर संस्‍कृति का हिस्‍सा हो गया।

 मिथुन राठोड ने जवाब का अनुरोध किया है

सोमवार, 23 दिसंबर 2019

रामायण अथवा महाभारत से कोई ऐसी कहानी जो आज भी प्रासंगिक हो?

महाभारत -
भीम और नकुल-सहदेव में भाग्‍य और ईश्‍वर को लेकर अक्‍सर बहस होती रहती थी। भीम भाग्‍य को नहीं मानते थे।
नकुल सहदेव को पाठ पढाने के लिए भीम ने एक बार एक चिडिया को पकड कर नकुल-सहदेव से पूछा कि बता कि इसका भाग्‍य किसके हाथ में हैं।
नकुल-सहदेव ने हार मान ली और चिडिया की जान बचाने को कहा कि भैया इसका भाग्‍य आपके हाथ है।
रामायण -
जब राम को वनवास हुआ तो लक्ष्‍मण ने राम से कहा कि भैया आप कहें तो मैं दशरथ-भरत युद्ध की चुनौती दे यहीं धूल चटा दूं और आपको गददी पर बिठाउं।
इसपर राम ने कहा कि यह शास्‍त्रोक्‍त नहीं है। पिता की आज्ञा ना मानना पाप है। फिर उन्‍होंने एक ऋषि का उदाहरण दिया जिन्‍होंने पिता के कहने पर गाय की हत्‍या कर दी थी पर उन्‍हें पाप नहीं लगा क्‍योंकि उनने पिता का वचन निभाया।
 Usha Wadhwa ने जवाब का अनुरोध किया है

शुक्रवार, 20 दिसंबर 2019

क्या ध्यान किसी प्रकार की जादुई शक्ति प्रदान करता है?

 गोपाल सिंह रावत ने जवाब का अनुरोध किया है

मंगलवार, 17 दिसंबर 2019

क्या भविष्य में हिन्दू धर्म का अंत सम्भव है?


देखिए, सभी धर्मों का अंत कब का हो चुका है अब इन धर्मों पर आधारित राजनीति चल रही है वह भी बाजार के नफे नुकसान के हिसाब से।

आप ही बताइए हिंदुओं का मुख्‍य धर्मग्रंथ वेद है पर कितने हिंदुओं ने वेद देखा है, पढने की बात तो दूर की है।

मनुस्‍मृति के अनुसार जो द्विज वेद नहीं पढता वह अपनी सात पीढियों के साथ शूद्र हो जाता है इस हिसाब से आज भारत में गिनती के ब्राह्मण,राजपूत भी नहीं मिलेंगे। सब शूद्र हुए फिर यह लडाई हिंदू धर्म की कहां रही।

राम मंदिर का ही मसला है तो यह भी बाजार का मामला है। दक्षिण के मंदिरों की आय आज सबसे ज्‍यादा है तो राम मंदिर बनने के बाद वह आय उत्‍तर भारत में बंटने लगेगी।

Ankur Chauhan ने जवाब का अनुरोध किया है

अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह के बगैर भारत का क्या होगा?


 भारत का क्‍या होगा, यह रहेगा, कुछ बात है कि हस्‍ती मिटती नहीं हमारी।

भारत देश से ज्‍यादा अवधारणा है जैसे हिंदू धर्म से ज्‍यादा अवधारणा है।

चंद्रगुप्‍त के समय के भारत का, हुमायू के, अकबर के, शाहजहां के, औरंगजेब के, अंग्रेजों के समय के भारत का और आज के भारत का नक्‍शा देखिए, हर नक्‍शा अलग है।

 Manjunatheshwara K J ने जवाब का अनुरोध किया है


सोमवार, 16 दिसंबर 2019

आदमी शराब क्यों पीता है?

शराब सेवन-मांसाहार को समाज के एक हिस्‍से में कुछ विशेष क्रिया की तरह माना जाता है इससे नये लडकों में इसके प्रति जिज्ञासा रहती है जिससे वे इस चक्‍कर में पडते हैं।
इस पर बेवजह प्रतिबंध को भी हम एक कारक की तरह मान सकते हैं जैसे हमारे देश में ब्रह्मचर्य का, संतई का बहुत ढोल बजता है और उस अनुपात में यहां बलात्‍कार रोज की घटना हो गयी है। तो यह प्रतिक्रिया या अशिक्षा के कारण भी अपनी जगह बना सकता है।
हमारे यहां जानने की बजाय अनुकरण करने पर जोर है इस तरह हम किसी विषय पर सोच विचार नहीं करते, अंधानुकरण करते हैं और गुलाम होते जाते हैं।
खुद चीजों को देख कर अपने अनुभव के आधार पर उसकी अच्‍छाई बुराई के परिपेक्ष्‍य में एक मत बना उसे नियंत्रित ढंग से प्रयोग में लाने लायक विकसित हम नहीं हुए हैं।
बुद्ध अहिंसा प्रेमी थे पर उनकी मौत भिक्षा में मिले मांस के खाने से हुई थी। हमें जीवन के अंतरविरोधों को भी उसके समय के संदर्भ में देखना आना चाहिए।
मेरे पिता वैष्‍णव थे, मेरे घर में कभी मांस शराब प्‍याज का प्रयोग नहीं हुआ। पर चाचा लोग मिलिट्री में थे वे इस सब का सेवन करते थे। तो मैंने भी उनकी संगत में यह सब चखा। पर ये चीजें मेरी पसंद में शामिल नहीं हुईं तो ऐसी कोई आदत नहीं बनी।
सवाल है अपनी पसंद बनाने भर आजादी जब तक समाज में नहीं होगी तब तक हम किसी बुराई को उपदेश से नहीं रोक सकते।

 Pradeep Srivastava ने जवाब का अनुरोध किया है

लोग जब गुस्से में होते हैं तो खाना क्यों छोड़ देते हैं? ऐसा कर वे क्या जाहिर करना चाहते हैं?

तीसेक साल पहले मैं भी कभी कभार नाराजगी में रात का खाना छोड़ देता था। नराजगी किसी से भी हो कारण कोई भी हो पर इस तरह की नाराजगी से चिंतित केव...